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Best Astrologer in India Pandit Ajay Gautam

यूनिवर्सल ज्योतिष के नौ ग्रहों (नवग्रहों) के बारे में 120 तथ्य (सूत्र), जिन्हें सभी ज्योतिष एक्सपर्ट ज्योतिषी मानते हैं

यूनिवर्सल ज्योतिष के नौ ग्रहों (नवग्रहों) के बारे में 120 तथ्य (सूत्र), जिन्हें सभी ज्योतिष एक्सपर्ट ज्योतिषी मानते हैं

120 Facts (Sutra) About Nine Planets (Navagrahas) of Universal Astrology, accepted by all Astrology Expert Astrologer

नीचे नवग्रहों के बारे में 100 सूक्ष्म, संक्षिप्त, शास्त्रीय “सूत्र–रूप” तथ्य (Sutras) दिए गए हैं — पूरी तरह हिंदू ज्योतिष / वैदिक ज्योतिष के मान्य सिद्धांतों पर आधारित, सरल एवं शुद्ध हिंदी में।

नवग्रहों के 100 सूत्र (हिंदी में)

सामान्य नवग्रह सूत्र (1–20)

  1. नवग्रह — नौ दैवीय ग्रहों का समूह है।

  2. ‘ग्रह’ का अर्थ है पकड़ने वाला या प्रभाव डालने वाला।

  3. नवग्रह हैं — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।

  4. सात ग्रह दृश्य हैं; राहु–केतु छाया ग्रह हैं।

  5. ग्रह जन्मपत्रिका में जीवन का मार्ग निर्धारित करते हैं।

  6. ग्रह कर्म, भाग्य, स्वास्थ्य, धन व आध्यात्म पर प्रभाव डालते हैं।

  7. सूर्य, चंद्र, गुरु सात्त्विक ग्रह हैं।

  8. शुक्र और बुध राजसिक ग्रह हैं।

  9. मंगल, शनि, राहु, केतु तामसिक ग्रह हैं।

  10. सात ग्रह सप्ताह के सात दिनों के दैवता हैं।

  11. राहु–केतु का कोई सप्ताह–दिन नहीं है।

  12. ग्रह विभिन्न दिशाओं, रंगों, धातुओं व तत्वों को नियंत्रित करते हैं।

  13. जन्मकुंडली में उनकी स्थिति जीवन के फल देती है।

  14. गोचर (Transit) ग्रहों का वर्तमान प्रभाव दर्शाता है।

  15. उच्छ (Exaltation) ग्रह को अत्यधिक शक्ति देता है।

  16. नीच (Debilitation) ग्रह को कमजोर करता है।

  17. मूलत्रिकोण ग्रह की दूसरी मजबूत स्थिति है।

  18. विम्शोत्तरी दशा फल–काल को निर्धारित करती है।

  19. मंत्र, यंत्र, दान, पूजा, रत्न ग्रहों के उपाय हैं।

  20. नवग्रहों की आराधना शांति और संतुलन प्रदान करती है।

सूर्य – Surya (21–32)

  1. सूर्य नवग्रहों के राजा हैं।

  2. सूर्य आत्मा, आत्मविश्वास, अधिकार का कारक है।

  3. सूर्य सिंह राशि का स्वामी है।

  4. मेष में उच्छ (10°) होता है।

  5. तुला में नीच (10°) होता है।

  6. सूर्य पिता, सरकार, हड्डियों, हृदय का कारक है।

  7. सूर्य अग्नि तत्व तथा सात्त्विक है।

  8. रविवार सूर्य का दिन है।

  9. दिशा — पूर्व।

  10. धातु — सोना; रत्न — माणिक्य (Ruby)।

  11. बीज मंत्र — ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

  12. मजबूत सूर्य नेतृत्व देता है; कमजोर सूर्य स्वास्थ्य व पिता से कष्ट देता है।

चंद्र – Chandra (33–44)

  1. चंद्र नवग्रहों की रानी है।

  2. चंद्र मन, भावनाओं, माता का कारक है।

  3. चंद्र कर्क राशि का स्वामी है।

  4. वृषभ में उच्छ (3°)।

  5. वृश्चिक में नीच (3°)।

  6. चंद्र जल, रक्त, नींद, पोषण का कारक है।

  7. चंद्र जल तत्व और राजसिक है।

  8. सोमवार चंद्र का दिन है।

  9. दिशा — उत्तर-पश्चिम।

  10. धातु — चाँदी; रत्न — मोती।

  11. बीज मंत्र — ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः

  12. मजबूत चंद्र मानसिक शांति देता है; कमजोर चंद्र चंचलता देता है।

मंगल – Mangal (45–56)

  1. मंगल नवग्रहों के सेनापति हैं।

  2. साहस, बल, अनुशासन, भूमि का कारक है।

  3. मेष और वृश्चिक के स्वामी हैं।

  4. मकर में उच्छ (28°)।

  5. कर्क में नीच (28°)।

  6. रक्त, भाई, दुर्घटना, भूमि का संकेतक है।

  7. मंगल अग्नि तत्व और तामसिक है।

  8. मंगलवार मंगल का दिन है।

  9. दिशा — दक्षिण।

  10. धातु — तांबा; रत्न — मूँगा।

  11. बीज मंत्र — ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

  12. मजबूत मंगल साहस बढ़ाता है; कमजोर मंगल झगड़े और ऋण देता है।

बुध – Budha (57–68)

  1. बुध नवग्रहों के युवराज हैं।

  2. बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित का कारक है।

  3. मिथुन और कन्या के स्वामी हैं।

  4. कन्या में उच्छ (15°)।

  5. मीन में नीच (15°)।

  6. बुध त्वचा, तंत्रिका और संवाद का कारक है।

  7. बुध पृथ्वी तत्व और राजसिक है।

  8. बुधवार बुध का दिन है।

  9. दिशा — उत्तर।

  10. धातु — कांसा; रत्न — पन्ना।

  11. बीज मंत्र — ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

  12. मजबूत बुध बुद्धिमत्ता देता है; कमजोर बुध भाषण व मानसिक तनाव देता है।

गुरु – Jupiter (69–80)

  1. गुरु देवताओं के आचार्य हैं।

  2. गुरु ज्ञान, धर्म, धन, संतान का कारक है।

  3. धनु और मीन के स्वामी हैं।

  4. कर्क में उच्छ (5°)।

  5. मकर में नीच (5°)।

  6. गुरु यकृत, शिक्षा, मार्गदर्शन का कारक है।

  7. गुरु वायु तत्व और सात्त्विक है।

  8. गुरुवार गुरु का दिन है।

  9. दिशा — ईशान (उत्तर-पूर्व)।

  10. धातु — सोना; रत्न — पुखराज।

  11. बीज मंत्र — ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

  12. मजबूत गुरु समृद्धि देता है; कमजोर गुरु मार्गदर्शन में बाधा देता है।

शुक्र – Shukra (81–92)

  1. शुक्र असुरों के गुरु हैं।

  2. प्रेम, कला, सुंदरता, विवाह का कारक है।

  3. वृषभ और तुला के स्वामी हैं।

  4. मीन में उच्छ (27°)।

  5. कन्या में नीच (27°)।

  6. शुक्र भोग, वाहन, स्त्री सौभाग्य का कारक है।

  7. शुक्र जल तत्व और राजसिक है।

  8. शुक्रवार शुक्र का दिन है।

  9. दिशा — आग्नेय (दक्षिण-पूर्व)।

  10. धातु — चाँदी; रत्न — हीरा।

  11. बीज मंत्र — ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

  12. मजबूत शुक्र वैभव देता है; कमजोर शुक्र संबंध विच्छेद देता है।

शनि – Shani (93–104)

  1. शनि न्यायाधीश और सेवक ग्रह हैं।

  2. कर्म, न्याय, विलंब, दुख का कारक है।

  3. मकर और कुंभ के स्वामी हैं।

  4. तुला में उच्छ (20°)।

  5. मेष में नीच (20°)।

  6. शनि हड्डी, आयु, सेवा और श्रम का कारक है।

  7. शनि वायु तत्व और तामसिक है।

  8. शनिवार शनि का दिन है।

  9. दिशा — पश्चिम।

  10. धातु — लोहा; रत्न — नीलम।

  11. बीज मंत्र — ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

  12. मजबूत शनि धैर्य देता है; कमजोर या पीड़ित शनि साढ़े–साती का कष्ट देता है।

राहु – Rahu (105–112)

  1. राहु छाया ग्रह है — शरीरहीन नोड।

  2. राहु इच्छा, भौतिकवाद, छल, विदेशी चीजों का कारक है।

  3. पारंपरिक रूप से वृषभ/मिथुन में उच्छ।

  4. वृश्चिक/धनु में नीच (परंपरा अनुसार)।

  5. राहु भ्रम, धुआँ, तकनीक, अचानक घटनाओं का स्वामी है।

  6. राहु तामसिक, वायव्य और धुँधला माना गया है।

  7. रत्न — गोमेद।

  8. बीज मंत्र — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

केतु – Ketu (113–120)

  1. केतु मोक्ष और वैराग्य का ग्रह है।

  2. यह भी छाया ग्रह है — शरीरहीन।

  3. परंपरागत रूप से वृश्चिक/धनु में उच्छ।

  4. वृषभ/मिथुन में नीच।

  5. केतु अध्यात्म, तपस्या, रहस्य और पूर्वजन्म कर्म का कारक है।

  6. केतु अग्नि तत्व और तामसिक है।

  7. रत्न — लहसुनिया (Cat’s Eye)।

  8. बीज मंत्र — ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः

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