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जन्म कुंडली के एकादश भाव के स्वामी (लाभेश) से जुड़े 50 तथ्य

जन्म कुंडली के एकादश भाव के स्वामी (लाभेश) से जुड़े 50 तथ्य

50 facts about the Lord of the Eleventh House (Labhesh) in the birth chart

जन्म कुंडली के एकादश भाव के स्वामी (लाभेश) के 50 महत्त्वपूर्ण तथ्य

  1. एकादश भाव का स्वामी लाभेश कहलाता है, जो आय, लाभ और इच्छापूर्ति का कारक है।

  2. यह बड़े भाई-बहन, मित्र, नेटवर्क, समूह और सामाजिक प्रभाव का प्रतिनिधि है।

  3. यह उपचय भाव होने से समय के साथ इसकी शुभता बढ़ती है।

  4. यह ‘काम त्रिकोण’ का हिस्सा है—इच्छाओं की पूर्ति का प्रमुख केंद्र।

  5. लाभेश तय करता है कि जातक किस माध्यम से आय प्राप्त करेगा।

  6. शुभ लाभेश निरंतर धन वृद्धि और स्थिर आय देता है।

  7. अशुभ लाभेश आय में रुकावट, अस्थिरता या धोखे की स्थिति बनाता है।

  8. लाभेश की दशा–अंतरदशा जीवन में उन्नति और नए अवसर प्रदान करती है।

  9. बलवान लाभेश लग्नेश के साथ संबंध बनाकर उन्नति कई गुना बढ़ा देता है।

  10. द्वितीयेश से शुभ संबंध धन संचय को अत्यधिक मजबूत करता है।

  11. दशमेश से संबंध करियर में जबरदस्त लाभ देता है।

  12. राजयोग के साथ जुड़ने पर लाभेश अत्यंत शुभफलकारी हो जाता है।

  13. नवमांश में बलवान लाभेश महादशा में दोगुना लाभ देता है।

  14. व्यापारियों के लिए लाभेश का शुभ होना आवश्यक है।

  15. शेयर बाजार, निवेश और सट्टा के लिए लाभेश का अनुकूल होना अनिवार्य है।

  16. लाभेश का मजबूत होना समाज में मान–सम्मान और पहचान बढ़ाता है।

  17. लाभेश व्यावसायिक नेटवर्क को मजबूत बनाता है।

  18. लाभेश खुशहाल सामाजिक व पेशेवर संपर्क देता है।

  19. टीमवर्क एवं समूह कार्य में सफलता इस भाव से जुड़ी है।

  20. लाभेश यह निर्धारित करता है कि जातक को किस प्रकार के मित्र मिलेंगे।

  21. लग्न में लाभेश — स्वयं प्रयासों से आय; प्रसिद्धि और आत्म-विश्वास।

  22. द्वितीय भाव में — धनी; कई आय स्रोत; उत्कृष्ट धन योग।

  23. तृतीय भाव में — पराक्रम, छोटे भाई-बहनों या संचार से लाभ।

  24. चतुर्थ भाव में — वाहन, संपत्ति, माता और पैतृक स्रोतों से लाभ।

  25. पंचम भाव में — शिक्षा, बुद्धि, बच्चों या निवेश से लाभ।

  26. षष्ठ भाव में — नौकरी, सेवा, प्रतियोगिता में जीत से लाभ; शत्रु पर विजय।

  27. सप्तम भाव में — साझेदारी, व्यापार या जीवनसाथी से लाभ; विदेश लाभ भी।

  28. अष्टम भाव में — अचानक धन, विरासत, बीमा, गुप्त लाभ।

  29. नवम भाव में — भाग्य से लाभ, पिता से सहायता, पुण्य कर्मों से आय।

  30. दशम भाव में — करियर में उन्नति, उच्च पद, बड़ा लाभ।

  31. एकादश भाव में — श्रेष्ठ परिणाम; आय का विस्तार; इच्छापूर्ति।

  32. द्वादश भाव में — विदेश, मल्टीनेशनल कंपनियों से लाभ; खर्च भी अधिक।

  33. नीच या पीड़ित लाभेश अवसरों को रोक सकता है।

  34. वर्गोत्तम लाभेश अत्यंत मजबूत फल देता है।

  35. उच्च राशि में लाभेश धनेश (धन भाव स्वामी) के समान शुभ कार्य करता है।

  36. वक्री लाभेश लाभ में देरी या उलझन पैदा कर सकता है।

  37. अस्त लाभेश आय को कमजोर कर देता है।

  38. शुभ दृष्टि लाभेश को शक्तिशाली बनाती है।

  39. पाप ग्रहों की युति आय में बाधा या गलत साधनों से धन दे सकती है।

  40. लाभेश यदि स्वयं 11वें भाव को देखे तो बहुत शुभ होता है।

  41. सूर्य से संबंध: राजकीय लाभ, सरकारी सहायता।

  42. चंद्र से संबंध: जनसंपर्क, महिलाओं या तरल पदार्थों से लाभ।

  43. मंगल से: भूमि, सोना, तकनीक, रियल एस्टेट से लाभ।

  44. बुध से: व्यापार, बुद्धि, लेखन या संचार क्षेत्र से आय।

  45. गुरु से: धर्म, शिक्षा, सलाह, मेंटरशिप से लाभ।

  46. शुक्र से: विलासिता, कला, फैशन, महिलाओं से लाभ।

  47. शनि से: स्थिर, धीमी लेकिन मजबूत आय; धातु, भूमि कार्य लाभकारी।

  48. राहु से: विदेशी, डिजिटल, आकस्मिक या असामान्य तरीकों से लाभ।

  49. केतु से: आध्यात्मिक, रहस्यमय कार्यों से लाभ; अचानक धन भी संभव।

  50. लाभेश की स्थिति से व्यक्ति की पूर्वजन्म इच्छाएँ और इस जन्म की प्राप्ति क्षमता स्पष्ट होती है।

  51. लाभेश कुंडली के फलादेश में केंद्र भूमिका निभाता है—आय, लक्ष्य, नेटवर्क, उन्नति सब इसकी शक्ति पर आधारित होते हैं।

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