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Best Astrologer in India Pandit Ajay Gautam

कुंडली में पांच ग्रहों की युति: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु

कुंडली में पांच ग्रहों की युति: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु

Conjunction of five planets in horoscope: Sun, Moon, Mars, Mercury, Guru (Jupiter), Venus, Saturn, Rahu and Ketu

कुंडली में पांच ग्रहों की युति का ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। जैसे कि सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु में से किसी भी पांच ग्रहों का एक ही भाव या राशि में एक साथ होना जातक के जीवन पर गहरा असर डालता है। इस प्रकार की युति शुभ या अशुभ दोनों प्रकार के फल दे सकती है, जो ग्रहों की स्थिति, उनकी प्रकृति और उस राशि की स्थिति पर निर्भर करता है।

पाँच ग्रहों की युति के प्रभाव:

यदि सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध और गुरु या शुक्र आदि पांच ग्रह किसी एक राशि में युति करें तो यह जातक के जीवन में बल, भाग्य, सफलता और समृद्धि ला सकता है।

कुछ राशियों के लिए यह युति भाग्योदय का कारण बनती है, जिससे कर्मस्थल, पारिवारिक जीवन और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

परन्तु यदि इस युति में शनि, राहु, केतु तथा अशुभ ग्रह शामिल हों, तो यह व्यक्ति के जीवन में तनाव, संघर्ष या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी ला सकता है।

उदाहरण के लिए, सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल और चंद्रमा वृषभ राशि में युति होने पर मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या राशि के जातकों को शुभ फल मिलने की संभावना अधिक होती है।

प्रसिद्ध युति और उनके परिणाम:

सूर्य-चंद्र-मंगल-बुध-गुरु की युति जातक को बुद्धिमान, नेतृत्व गुणवत्ता संपन्न, और समृद्ध बनाने वाली होती है।

सूर्य-बुध-बृहस्पति-शनि या सूर्य-चंद्र-शुक्र-शनि जैसी युति जातकों में संयम, विस्तारवादी सोच, और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

मंगल और शनि की युति थोड़ी जटिल होती है क्योंकि ये दोनों ग्रह स्वभाव से विरोधी हैं; इससे जातक को मानसिक तनाव या व्यावसायिक बाधाएं भी आ सकती हैं।

राहु और केतु की उपस्थिति:

राहु और केतु के साथ किसी गुरु या मंगल जैसे ग्रह की युति योग दोष भी उत्पन्न कर सकती है, जिससे सावधानी पूर्वक उपाय करने की आवश्यकता होती है।

ये ग्रह जातक के जीवन में अनियंत्रित उतार-चढ़ाव और मानसिक अस्थिरता का कारण बन सकते हैं।

विशेष योग – पंचग्रही योग:

जब पांच ग्रह एक साथ किसी एक भाव या राशि में युति करते हैं, तो उसे पंचग्रही योग कहा जाता है। यह योग जातक के भाग्य को मजबूत करता है, समाज में मान-सम्मान बढ़ाता है तथा आर्थिक स्थिति मजबूत बनाता है।

इस योग का फल राशियों के अनुसार भिन्न होता है, लेकिन सामान्यतया यह जातक को राजा जैसे जीवन, सुविधा और सफलता दिलाता है।

इस प्रकार, कुंडली में पांच ग्रहों की युति का फल शुभ या अशुभ दोनों हो सकता है, जो ग्रहों के प्रकार, राशि, भाव और स्थिति पर निर्भर करता है। विस्तृत और व्यक्तिगत कुंडली देखकर ही सही योगफल की सटीक जानकारी मिलती है। इसलिए कुंडली विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे उचित रहता है।

संक्षिप्त में: पाँच ग्रहों की युति जातक के जीवन में गहरा प्रभाव डालती है—शुभ हो तो भाग्य, समृद्धि, और सफलता देते हैं; अशुभ हो तो संघर्ष, रोग और मानसिक तनाव भी हो सकते हैं।

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