किस ग्रह की महादशा में किस ग्रह की अंतर्दशा खराब परिणाम देती है
Which planet’s antardasha in which planet’s mahadasha gives bad results
महादशा–अन्तर्दशा में अशुभ संयोजन
सूर्य महादशा
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शनि, राहु, केतु की अन्तर्दशा → संघर्ष, प्रतिष्ठा हानि, पिता/सरकारी मामलों में समस्या।
चन्द्र महादशा
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शनि, राहु, केतु अन्तर्दशा → मानसिक तनाव, गृहकलह, स्वास्थ्य समस्या।
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अगर चन्द्र नीच या पापदृष्ट है तो और भी कष्ट।
मंगल महादशा
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राहु, केतु, शनि अन्तर्दशा → दुर्घटना, शत्रु बाधा, कोर्ट केस।
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अगर मंगल कुण्डली में नीच या मारक भाव में है तो अधिक विपत्ति।
बुध महादशा
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केतु, शनि, राहु अन्तर्दशा → मानसिक भ्रम, व्यापार में हानि, मित्रता टूटना।
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अगर बुध पापग्रह से पीड़ित है तो झूठे आरोप या धोखा।
गुरु महादशा
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शनि, राहु, केतु अन्तर्दशा → परिवारिक समस्या, संतान पीड़ा, धन की हानि।
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यदि गुरु नीच या अष्टम में है तो आध्यात्मिक परीक्षा या ऋण।
शुक्र महादशा
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शनि, राहु, केतु, सूर्य अन्तर्दशा → विवाह/संबंधों में संकट, व्यभिचार, धन हानि।
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अगर शुक्र नीच हो तो रोग (प्रजनन/मूत्र संबंधी)।
शनि महादशा
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सूर्य, मंगल, राहु, केतु अन्तर्दशा → संघर्ष, कष्ट, सरकारी दबाव, बीमारी।
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खासकर जब शनि नीच या चन्द्र से अशुभ दृष्ट हो।
राहु महादशा
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सूर्य, चन्द्र, मंगल अन्तर्दशा → अचानक संकट, अपमान, दुर्घटना, कानूनी परेशानी।
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राहु की दशा में अक्सर अत्यधिक उतार-चढ़ाव होते हैं।
केतु महादशा
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सूर्य, चन्द्र, मंगल अन्तर्दशा → अलगाव, दुर्घटना, मानसिक बेचैनी, आध्यात्मिक दबाव।
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केतु की दशा अक्सर “त्याग” और “खोने” का अनुभव कराती है।
विशेष ध्यान
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यदि कोई ग्रह योगकारक हो (जैसे लग्न या त्रिकोण का स्वामी) → उसकी अन्तर्दशा शुभ फल भी दे सकती है।
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यदि ग्रह उच्च (उच्च राशी में), स्वगृही, या शुभ भाव में हो → अशुभ फल कम हो जाते हैं।
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दशा का फल हमेशा लग्न, चन्द्र लग्न और गोचर से मिलाकर देखा जाता है।
