कुंडली में लाभ भाव (एकादश भाव) और लाभेश से संबंधित 50 सूत्र
50 sutras related to the eleventh house and the lord of profit in the horoscope
(A) लाभ भाव—एकादश भाव के 25 सूत्र
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एकादश भाव को लाभ, आय, इच्छाओं की पूर्ति और आकांक्षाओं का मुख्य स्थान कहा जाता है।
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यह भाव नौकरी, व्यापार या किसी भी माध्यम से होने वाली आमदनी का द्योतक है।
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यह उपचय भाव है, इसलिए यहाँ पाप ग्रह भी फलदायी हो सकते हैं।
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लाभ भाव जातक के सामाजिक नेटवर्क, मित्रों और सहयोगियों का प्रतिनिधित्व करता है।
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इस भाव में शक्तिशाली ग्रह जातक की महत्वाकांक्षा और उपलब्धि क्षमता बढ़ाते हैं।
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लाभ भाव का मजबूत होना आय के स्थिर और लगातार बढ़ते स्रोत प्रदान करता है।
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11वें भाव में शुभ ग्रह हों तो उच्च धन और समृद्धि का संकेत मिलता है।
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पाप ग्रह यहाँ हों तो आय तो मिलती है, पर स्थिरता कम हो सकती है।
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उच्च के ग्रह 11वें भाव में हों तो अत्यन्त तीव्र गति से धन वृद्धि होती है।
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इस भाव से बोनस, इन्क्रीमेंट, कमिशन और अतिरिक्त आय देखी जाती है।
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11वें से बड़े भाई-बहनों का सुख और उनसे संबंध का विश्लेषण किया जाता है।
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11वें पर 9वें की दृष्टि या संबंध हो तो भाग्य से लाभ प्राप्त होता है।
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11वें भाव पर 6, 8, 12 का प्रभाव लाभ में बाधा या देरी लाता है।
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इस भाव में स्थित ग्रह आय के स्रोतों की प्रकृति बताते हैं — किस माध्यम से धन आएगा।
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11वां भाव इच्छा-सिद्धि का सीधा प्रतिनिधि है।
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इस भाव में अनेक ग्रह हों तो आय के कई स्रोत बनते हैं।
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11वें भाव का संबंध प्रसिद्धि, लोकप्रियता और सामाजिक सम्मान से भी है।
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इस भाव से जनता, समुदाय और बड़े दायरे से मिलने वाला समर्थन दिखता है।
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लाभ भाव के कारक ग्रह बृहस्पति माने जाते हैं।
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यदि 11वें में राहु हो तो विदेशी स्रोतों से या अनपेक्षित ढंग से धन आ सकता है।
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11वें में केतु हो तो भौतिक लाभ होते हुए भी रुचि या लगाव कम रहता है।
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इस भाव में सूर्य हो तो नेतृत्व से लाभ मिलता है।
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चंद्रमा हो तो मनोवैज्ञानिक स्थिरता और नियमित आय प्राप्त होती है।
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शनि हो तो धीमी लेकिन स्थायी आय और दीर्घकालिक संपत्ति बनती है।
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लाभ भाव जितना शुभ होगा, जातक जीवन में उतना ही धनी, समर्थ और सामाजिक रूप से प्रभावशाली होता है।
(B) लाभेश (11वें भाव के स्वामी) के 25 सूत्र
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लाभेश जिस भाव में स्थित हो, उस भाव के संकेतों के माध्यम से लाभ प्राप्त होते हैं।
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लाभेश मजबूत हो तो जातक को धनाभाव कभी नहीं रहता।
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नीचस्थ लाभेश आय में संघर्ष और देरी देता है।
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लाभेश केंद्र या त्रिकोण में हो तो श्रेष्ठ आय योग बनते हैं।
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उच्छ लाभेश अचानक या असाधारण लाभ देता है।
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लाभेश पाप प्रभाव में हो तो आय अनिश्चित या अस्थिर हो जाती है।
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वक्री लाभेश पूर्व जन्म के कार्यों से लाभ दिलाता है।
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लाभेश पर शुभ दृष्टि लाभ के अवसर कई गुना बढ़ाती है।
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लाभेश और धनेश का संबंध श्रेष्ठ धन योग बनाता है।
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लाभेश और लग्नेश का योग या परिवर्तन योग अत्यंत भाग्यशाली बनाता है।
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लाभेश दसवें भाव में हो तो करियर से उत्कृष्ट लाभ मिलता है।
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लाभेश नवम में हो तो भाग्य से लाभ मिलता है।
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लाभेश सप्तम में हो तो विवाह, साझेदारी या जनता से लाभ होता है।
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लाभेश पंचम में हो तो शिक्षा, संतान, शेयर बाजार और स्पेकुलेशन से लाभ होता है।
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लाभेश चतुर्थ में हो तो वाहन, संपत्ति और माता के माध्यम से लाभ।
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लाभेश तृतीय में हो तो स्वयं के प्रयास, साहस और कौशल से आय।
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लाभेश द्वितीय में हो तो संचित धन और धन भंडारण में तीव्र वृद्धि।
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लाभेश षष्ठ, अष्टम या द्वादश में हो तो संघर्ष के बाद लाभ मिलता है।
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लाभेश अष्टम में हो तो विरासत, बीमा, गुप्त माध्यम से लाभ पर अनिश्चितता।
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लाभेश बृहस्पति से दृष्ट या युति में हो तो उत्कृष्ट धन योग बनता है।
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लाभेश राहु/केतु से प्रभावित हो तो अचानक लाभ-हानि दोनों की संभावनाएँ रहती हैं।
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लाभेश दिग्बलयुक्त हो तो अत्यंत उच्च स्तर की आय और प्रतिष्ठा देता है।
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नीचभंग लाभेश आय को फिर भी मजबूत बनाए रखता है।
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उपचय भावों (3,6,10,11) में लाभेश हो तो समय के साथ आय बढ़ती है।
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लाभेश की दशा–अंतर्दशा में जीवन के सबसे बड़े आर्थिक अवसर प्राप्त होते हैं।
