कुंडली के किन-किन भावों एवं किन-किन राशियों में शुभ और अशुभ फल देते हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु
In which houses and which zodiac signs of the horoscope they give auspicious and inauspicious results: Sun, Moon, Mars, Mercury, Guru (Jupiter), Venus, Saturn, Rahu and Ketu
कुंडली के भावों और राशियों में ग्रहों के शुभ-अशुभ फल मुख्यतः इस प्रकार होते हैं:
सूर्य का प्रभाव
-
भावों पर:
-
प्रथम भाव में सूर्य माता से अच्छे संबंध, भाग्य का साथ लेकिन क्रोधी स्वभाव।
-
द्वितीय भाव में मल्टी टैलेंटेड, सफलता लेकिन पारिवारिक समस्याएं।
-
तृतीय भाव में साहस, स्पष्टता से बात, चुनौती कम।
-
चतुर्थ भाव में अच्छा स्वास्थ्य, पैसे की बचत।
-
पंचम भाव में बुद्धि बढ़ती है, क्रोधी स्वभाव।
-
षष्ठम भाव में शत्रुओं पर विजय, स्वास्थ्य ठीक।
-
सप्तम भाव में स्वाभिमानी, सामाजिक व पारिवारिक परेशानी।
-
अष्टम भाव में मिलेजुले परिणाम, हृदय रोग का खतरा, आर्थिक मजबूती।
-
-
राशियों में: उच्च मेष राशि में, नीच तुला राशि में होता है।
-
शुभ प्रभाव से मान-सम्मान, सफलता, ऊर्जा, साहस, नेतृत्व क्षमता मिलती है। अशुभ प्रभाव से स्वास्थ्य समस्याएं, परिवार व सामाजिक समस्याएं होती हैं.
चंद्र का प्रभाव
-
राशियों में: उच्च वृषभ, नीच वृश्चिक।
-
कुंडली में चतुर्थ भाव में शुभः परिवार, मां से संबंधित फल। अशुभ होने पर मानसिक तनाव।
-
चंद्र-बुध या चंद्र-मंगल युति सप्तम भाव में मनमुटाव या उग्र स्वभाव ला सकती है.
मंगल का प्रभाव
-
राशियों में: उच्च मकर, नीच कर्क।
-
तीसरे और छठे भाव में शुभ, साहस, पराक्रम और शत्रुओं पर विजय। आठवें भाव में हानि संभव।
-
उग्रता और लड़ाई झगड़े का कारण हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य व कार्यक्षमता सुनिश्चित करता है.
बुध का प्रभाव
-
राशियों में: उच्च कन्या, नीच मीन।
-
चौथे और दसवें भाव में शुभ, बुद्धिमत्ता, वाणी की कुशलता।
-
अशुभ बुध व्यापार में बाधा, मानसिक तनाव उत्पन्न कर सकता है.
गुरु (बृहस्पति) का प्रभाव
-
राशियों में: उच्च कर्क, नीच मकर।
-
द्वितीय, पंचम, नवम, दशम भावों में शुभ फल देता है। ज्ञान, न्याय, शुभता और समृद्धि लाता है।
-
अशुभ होने पर ज्ञान व भाग्य की हानि संभव है.
शुक्र का प्रभाव
-
स्त्री, माया, सौंदर्य का कारक है।
-
शुभ होने पर कला, प्रेम, संसाधनों की वृद्धि करता है। अशुभ होने पर संसाधन हानि होती है, वैवाहिक जीवन प्रभावित हो सकता है.
शनि का प्रभाव
-
राशियों में: उच्च तुला, नीच मेष।
-
षष्ठम, अष्टम और दशम भावों में विराजमान होकर कष्ट, धैर्य और कर्म क्षेत्र में मजबूती देता है।
-
अशुभ तो बंधन, रोग, विघ्न और कष्ट देता है.
राहु और केतु
-
राहु उच्च वृषभ, नीच वृश्चिक में होते हैं। केतु उच्च वृश्चिक, नीच वृषभ में।
-
राहु और केतु शक्ति बढ़ाते हैं, लेकिन भ्रम, लालच, झूठ, कटुता भी फैलाते हैं।
-
राहु पंचम भाव में, केतु नवम भाव में पूर्ण दृष्टि रखते हैं। ये दोनों ग्रह ज्योतिष में छाया ग्रह हैं और अशुभ प्रभाव भी दे सकते हैं.
संक्षेप में, ग्रहों का शुभ-अशुभ फल भावों के साथ-साथ उन राशियों पर भी निर्भर करता है जिनमें वे विराजमान होते हैं। शुभ ग्रहों की युति शुभ फल देती है जबकि अशुभ ग्रह या अशुभ स्थान अशुभ फल देते हैं। ग्रहों की दृष्टि व युति भी कुंडली के फल को प्रभावित करती है.