खुश रहने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के 10 आसान तरीके
खुश रहना केवल चेहरे पर मुस्कान बनाए रखने का नाम नहीं है। वास्तविक खुशी उस मानसिक स्थिति से जुड़ी है जिसमें व्यक्ति अपने जीवन की परिस्थितियों, तनाव, रिश्तों, जिम्मेदारियों और उतार-चढ़ाव के बीच भी भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सक्षम होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य केवल किसी मानसिक बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि ऐसी मानसिक भलाई की स्थिति है जिसमें व्यक्ति जीवन के तनावों से निपट सके, अपनी क्षमताओं को पहचान सके, काम और सीखने में सक्षम रहे तथा अपने समुदाय में योगदान दे सके। इसलिए खुश रहने की कोशिश और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल वास्तव में एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खुश रहने के लिए हमेशा बड़े बदलावों की आवश्यकता नहीं होती। कई बार रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें मन की स्थिति में बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं। WHO और अमेरिकी National Institute of Mental Health जैसी संस्थाएं भी नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, स्वस्थ भोजन, सामाजिक जुड़ाव, तनाव प्रबंधन, आरामदायक गतिविधियों और सकारात्मक सोच जैसी आदतों को मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल का हिस्सा मानती हैं।
पहला आसान तरीका है कि रोज कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकाला जाए। इसके लिए जिम जाना या कठिन व्यायाम करना जरूरी नहीं है। तेज कदमों से पैदल चलना, योग करना, साइकिल चलाना, नृत्य करना, सीढ़ियां चढ़ना या कुछ समय बाहर घूमना भी शुरुआत के लिए पर्याप्त हो सकता है। WHO के अनुसार शारीरिक गतिविधि मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण को बेहतर बनाने में मदद करती है तथा चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में भी उपयोगी हो सकती है। NIMH भी नियमित व्यायाम को मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताता है और कहता है कि रोजाना लगभग 30 मिनट की पैदल चाल भी मूड और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकती है।
दूसरा तरीका है नींद को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करना। लगातार कम सोना केवल शरीर को थकाता नहीं, बल्कि चिड़चिड़ापन, तनाव, ध्यान की कमी और भावनात्मक असंतुलन को भी बढ़ा सकता है। WHO नियमित सोने-जागने का समय बनाए रखने, सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कम करने और आरामदायक नींद का वातावरण बनाने की सलाह देता है। CDC के अनुसार वयस्कों को सामान्यतः हर रात कम से कम सात घंटे की नींद की जरूरत होती है। इसलिए देर रात तक मोबाइल देखने या काम करते रहने को उत्पादकता समझने के बजाय पर्याप्त नींद को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में निवेश समझना अधिक उपयोगी है।
तीसरा तरीका है अपने लोगों से जुड़े रहना। मनुष्य सामाजिक प्राणी है और अकेलेपन का अनुभव मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। किसी दोस्त को फोन करना, परिवार के साथ बैठना, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपनी बात साझा करना या केवल किसी प्रिय व्यक्ति के साथ कुछ समय बिताना भी मन को हल्का कर सकता है। CDC के अनुसार मजबूत और सकारात्मक सामाजिक संबंध तनाव, चिंता और अवसाद से निपटने की क्षमता को बेहतर बनाने तथा नींद और समग्र स्वास्थ्य को समर्थन देने में मदद कर सकते हैं। इसलिए व्यस्त जीवन में रिश्तों के लिए समय निकालना कोई अतिरिक्त काम नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की एक आवश्यक आदत है।
चौथा तरीका है अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें पहचानना और स्वीकार करना। हर समय खुश रहने की कोशिश भी मानसिक दबाव पैदा कर सकती है। दुख, गुस्सा, चिंता, निराशा या अकेलापन जीवन के सामान्य मानवीय अनुभव हैं। मानसिक रूप से स्वस्थ होने का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति कभी दुखी न हो, बल्कि यह है कि वह अपनी भावनाओं को समझने और उनके साथ स्वस्थ तरीके से काम करने की क्षमता विकसित करे। WHO की तनाव प्रबंधन सामग्री लोगों को कठिन भावनाओं को पहचानने, वर्तमान क्षण से जुड़ने और स्वयं के प्रति दयालु रहने जैसी तकनीकों का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
पांचवां तरीका है हर दिन कुछ समय ऐसी गतिविधि के लिए निकालना जिसे आप वास्तव में पसंद करते हैं। पढ़ना, संगीत सुनना, बागवानी करना, खाना बनाना, चित्र बनाना, प्रकृति में घूमना, पालतू जानवर के साथ समय बिताना या कोई पुराना शौक फिर से शुरू करना मन को आराम दे सकता है। NIMH नियमित रूप से ऐसी कम तनाव वाली गतिविधियों को करने की सलाह देता है जिनमें व्यक्ति आनंद महसूस करता है। इसका उद्देश्य हर गतिविधि को किसी उपलब्धि में बदलना नहीं, बल्कि जीवन में ऐसे क्षण पैदा करना है जिनमें व्यक्ति केवल काम करने के बजाय जीवन का अनुभव कर सके।
छठा तरीका है अपने विचारों पर ध्यान देना। कई बार वास्तविक समस्या जितनी बड़ी होती है, उससे कहीं ज्यादा बड़ा उसे लेकर हमारा लगातार नकारात्मक सोचना हो सकता है। किसी गलती के बाद स्वयं को असफल व्यक्ति मान लेना, भविष्य के बारे में हमेशा सबसे बुरा अनुमान लगाना या दूसरों से लगातार अपनी तुलना करना मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है। NIMH नकारात्मक और अनुपयोगी विचारों को पहचानने तथा उन्हें चुनौती देने की सलाह देता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर नकारात्मक विचार को जबरदस्ती सकारात्मक बना दिया जाए, बल्कि यह देखना है कि क्या हमारा विचार तथ्य पर आधारित है या डर और अनुमान पर।
सातवां तरीका है कृतज्ञता की आदत विकसित करना। कृतज्ञता का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति अपनी समस्याओं को नजरअंदाज करे या कठिन परिस्थितियों को अच्छा बताने लगे। इसका अर्थ है कि परेशानियों के बीच भी जीवन में मौजूद अच्छी चीजों को पहचानने की क्षमता विकसित की जाए। हर दिन कुछ ऐसी चीजों को याद करना जिनके लिए आप आभारी हैं, जैसे परिवार, दोस्त, स्वास्थ्य, काम, प्रकृति, कोई उपलब्धि या जीवन का कोई छोटा सुख, ध्यान को केवल समस्याओं पर केंद्रित रहने से रोक सकता है। NIMH और CDC दोनों दैनिक कृतज्ञता के अभ्यास को तनाव और भावनात्मक कल्याण के लिए उपयोगी रणनीतियों में शामिल करते हैं।
आठवां तरीका है सोशल मीडिया और नकारात्मक खबरों की खपत को सीमित करना। लगातार दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना, विवादित सामग्री देखना या दिनभर नकारात्मक खबरों में डूबे रहना मन को लगातार तनाव की स्थिति में रख सकता है। WHO विशेष रूप से यह सुझाव देता है कि यदि खबरों का अधिक सेवन तनाव बढ़ा रहा हो तो उसके लिए समय सीमित किया जाए। इसका अर्थ समाचारों से पूरी तरह दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह तय करना है कि सूचना हमारी जिंदगी को नियंत्रित न करने लगे। दिन में कुछ निश्चित समय पर समाचार देखना और बाकी समय अपने वास्तविक जीवन, रिश्तों तथा काम पर ध्यान देना अधिक संतुलित तरीका हो सकता है।
नौवां तरीका है अपने दिन को व्यवस्थित करना और हर चीज को एक साथ करने की कोशिश न करना। लगातार अधूरे काम, अवास्तविक लक्ष्य और हर व्यक्ति को खुश करने की कोशिश मानसिक थकान बढ़ा सकती है। WHO नियमित दिनचर्या बनाने और काम, भोजन, व्यायाम, परिवार तथा मनोरंजन के लिए समय निर्धारित करने की सलाह देता है। NIMH भी प्राथमिकताएं तय करने, यह समझने कि क्या अभी करना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों को मना करने की सलाह देता है। मानसिक शांति के लिए कभी-कभी अधिक काम करना नहीं, बल्कि यह तय करना जरूरी होता है कि कौन-सा काम अभी नहीं करना है।
दसवां और शायद सबसे महत्वपूर्ण तरीका है जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच न करना। स्वयं की देखभाल उपयोगी है, लेकिन यह पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य उपचार का विकल्प नहीं है। WHO के अनुसार self-care स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जगह लेने के बजाय उनका पूरक है। यदि लगातार उदासी, निराशा, अत्यधिक चिंता, नींद में गंभीर बदलाव, किसी पसंदीदा गतिविधि में रुचि खत्म होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी जैसी समस्याएं बनी रहती हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से बात करना उचित है। NIMH विशेष रूप से सलाह देता है कि गंभीर या परेशान करने वाले लक्षण दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बने रहें तो पेशेवर मदद ली जानी चाहिए।
इन दस तरीकों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें एक ही दिन में पूरी तरह अपनाने की जरूरत नहीं है। खुशी कोई ऐसा लक्ष्य नहीं है जिसे हासिल करने के बाद जीवन में हमेशा के लिए दुख समाप्त हो जाए। जीवन में तनाव, असफलता, दुख और अनिश्चितता आते रहेंगे। मानसिक मजबूती का वास्तविक अर्थ यह है कि इन परिस्थितियों के बीच व्यक्ति अपने शरीर, विचारों, भावनाओं और रिश्तों की देखभाल करना सीखता रहे। छोटी-सी दैनिक सैर, समय पर सोना, किसी अपने से बात करना, कुछ मिनट गहरी सांस लेना, पसंद का काम करना या दिन के अंत में किसी अच्छी बात को याद करना मामूली लग सकता है, लेकिन लगातार दोहराई गई ऐसी आदतें जीवन की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
खुश रहने का सबसे व्यावहारिक रास्ता यह नहीं है कि हम हर परिस्थिति को अपने अनुसार बदलने की कोशिश करें, बल्कि यह है कि जिन चीजों पर हमारा नियंत्रण है, उनमें छोटे और स्वस्थ बदलाव करें। अपने शरीर को पर्याप्त आराम दें, मन को लगातार नकारात्मकता से बचाएं, लोगों से जुड़े रहें, अपनी भावनाओं को समझें, प्रकृति और पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालें, जरूरत से ज्यादा जिम्मेदारियां लेने से बचें और जरूरत पड़ने पर मदद स्वीकार करें। WHO की हालिया मानसिक स्वास्थ्य और self-care सामग्री भी इसी व्यापक दृष्टिकोण को समर्थन देती है कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाई जाने वाली स्वस्थ आदतों और आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर सहायता—दोनों से मिलकर बनती है।
