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आडल योग, विडाल योग

आडल योग, विडाल योग Adal Yoga, Vidal Yoga

आडल योग और विडाल योग दोनों ही हिन्दू पंचांग और ज्योतिष में उल्लेखित “योग” श्रेणी के युति (Combinations) हैं, जिनका उपयोग शुभ-अशुभ मुहूर्त के निर्धारण में किया जाता है।

आडल योग क्या है?

  • आडल योग को अशुभ योगों में गिना जाता है। जब यह योग बनता है तो उस समय कोई भी विशेष शुभ कार्य (जैसे गृह प्रवेश, नई शुरुआत, कलश स्थापना, विवाह, आदि) करने की सलाह नहीं दी जाती।

  • इसका कारण है कि आडल योग में किये गए कार्यों का अपेक्षित फल शीघ्र नहीं मिलता या परिणाम मनोनुकूल नहीं होता, इसलिए शुभ कार्यों से बचना उचित माना गया है।

  • इसे नवरात्र जैसे महत्वपूर्ण पर्वों के पहले दिन भी देखा जाता है, और पंचांग में आडल योग की स्थिति स्पष्ट बताई जाती है।

विडाल योग क्या है?

  • विडाल योग भी पंचांग में उल्लेखित योगों में से एक है। यह भी आमतौर पर अशुभ योगों की श्रेणी में आता है।

  • विडाल योग के समय भी शुभ कार्यों, नए कार्यों का आरंभ, पूजा-अनुष्ठान आदि करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय मानसिक अस्थिरता, कार्य में अड़चनें, विचारों में उलझन अधिक रहती है। जातक का मन अपने कार्य पर उचित एकाग्र नहीं रहता, जिससे सफलता में बाधा आती है।

प्रमुख बिंदु

  • पंचांग के अनुसार, दिन में कौन सा योग चल रहा है, उसे देखकर ही शुभ अथवा मंगल कार्य प्रारंभ करना चाहिए।

  • आडल और विडाल दोनों योगों में विशेषतः नए कार्य, विवाह, गृह प्रवेश एवं अन्य मंगल कार्य टालने की सलाह दी जाती है।

  • व्यापारिक कार्यों या सामान्य दैनंदिन कार्यों में इन योगों का इतना कड़ा असर या महत्व नहीं माना जाता, लेकिन बड़े कर्म और धार्मिक आयोजनों में इनकी गणना आवश्यक है।

1. आडल योग (Adal Yog)

  • यह शब्द हिंदी ज्योतिष या पारंपरिक वास्तु में कभी-कभी मिलता है।

  • अक्सर इसे नकारात्मक या अवरोधकारी योग के रूप में समझाया जाता है।

  • सरल शब्दों में, आडल योग किसी कार्य या योजना में विलंब या बाधा दर्शाता है।

  • ज्योतिष में यह ग्रहों की स्थिति और उनके प्रभाव से उत्पन्न होता है।

संकेत:

  • व्यापार में मंदी

  • स्वास्थ्य समस्याएँ

  • जीवन में कठिनाइयाँ


2. विडाल योग (Vidal Yog)

  • विडाल योग का प्रयोग ज्योतिष में कुछ विशेष सकारात्मक योग या नकारात्मक योग दोनों संदर्भों में देखा जा सकता है।

  • कुछ ग्रंथों में इसे सफलता या सम्मान में बाधा के योग के रूप में बताया गया है।

  • इसका प्रभाव ग्रहों की विशेष स्थिति और भाव पर निर्भर करता है।

संकेत:

  • विडाल योग होने पर व्यक्ति को सामाजिक या आर्थिक क्षेत्र में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।

  • सही उपाय (जैसे दान, पूजा, मंत्र) से इसे कम किया जा सकता है।

  • ये योग किसी भी जन्मपत्री में ग्रहों की स्थिति के आधार पर लागू होते हैं।

  • इनके नाम अलग-अलग क्षेत्रों और पुस्तकों में थोड़े बदल सकते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में ‘आडल योग’ और ‘विडाल योग’ दोनों को ही अशुभ योग माना जाता है। ये योग कुछ विशेष परिस्थितियों में बनते हैं और इनके प्रभाव को शुभ नहीं माना जाता है।

आडल योग (Aadal Yog)

  • निर्माण: आडल योग का निर्माण उस समय होता है जब कोई वार और नक्षत्र का संयोग इस प्रकार हो कि वह अशुभ माना जाता है। इसे शुभ कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
  • प्रभाव: इस योग में किए गए कार्यों का परिणाम तुरंत या शुभ नहीं मिलता है। कुछ ज्योतिषियों के अनुसार, यह योग नकारात्मकता और बाधाएं उत्पन्न करता है। इसलिए, इस योग के समय शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
  • उदाहरण: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन, प्रतिपदा तिथि पर कुछ सालों में आडल योग का निर्माण होता है, जिसे शुभ नहीं माना जाता।

विडाल योग (Vidal Yog)

  • निर्माण: विडाल योग भी एक अशुभ योग है। इसका निर्माण उस समय होता है जब तिथि और नक्षत्र का संयोग अशुभ हो।
  • प्रभाव: यह योग भी शुभ कार्यों में बाधाएं उत्पन्न करता है। इस योग के दौरान किए गए कार्य सफल नहीं होते हैं या उनका परिणाम नकारात्मक हो सकता है।
  • उदाहरण: कुछ पंचांगों में विडाल योग के समय को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाता है, और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है।

संक्षेप में, दोनों ही योग नकारात्मक माने जाते हैं और इनका संबंध पंचांग के विशिष्ट घटकों (वार, तिथि और नक्षत्र) के साथ होता है। इन योगों के प्रभाव से बचने के लिए लोग अक्सर शुभ मुहूर्त की तलाश करते हैं और इन अशुभ समयों में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य करने से बचते हैं।

यदि आप अपना या किसी विशेष तिथि का मुहूर्त देखना चाहें, तो स्थानीय पंचांग या प्रमाणित ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।