कुंडली में दो ग्रहों की युति: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु
Conjunction of two planets in horoscope: Sun, Moon, Mars, Mercury, Guru (Jupiter), Venus, Saturn, Rahu and Ketu
कुंडली में जब कोई भी दो ग्रह एक ही भाव या राशि में साथ-साथ स्थित होते हैं, तो इसे उन दोनों ग्रहों की युति या conjunction कहा जाता है। यह युति दोनों ग्रहों के प्रभावों का संयोग बनाती है, जिससे व्यक्ति के जीवन पर विशिष्ट फल प्राप्त होते हैं—इनका परिणाम ग्रहों की प्रकृति, ताकत, और भाव/राशि के आधार पर भिन्न हो सकता है।
नीचे नौ ग्रहों में से दो-दो ग्रह की प्रमुख युतियों एवं उनके सामान्य फलों का परिचय दिया गया है (प्रसंगवश संक्षिप्त—ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए केवल संकेत):
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सूर्य + चंद्र: राजयोग, अधिकार, दो विवाह, गृहस्थ जीवन में मिलाजुला प्रभाव।
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सूर्य + मंगल: साहस, अग्नि तत्व कार्यों में सफलता, अधिकारी पद, सिर में चोट या समस्याएं।
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सूर्य + बुध: उच्च विद्या, सरकारी सेवा, ज्योतिष ज्ञान, मेहनत से सफलता।
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सूर्य + गुरु (बृहस्पति): सम्मान, उच्च पद, खुद के प्रयास से उपलब्धि—परंतु पिता के लिए शुभ नहीं।
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सूर्य + शुक्र: कला, क्रोध, प्रेम सम्बन्ध, संतान संबंधी विलंब।
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सूर्य + शनि: पिता-पुत्र संबंधों में खटास, स्वास्थ्य में कमजोरी, घरेलू अशांति।
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सूर्य + राहु: सरकारी क्षेत्र में परेशानी, खर्च, परिवारिक नाम खराब होने की संभावना।
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सूर्य + केतु: सरकारी मामलों में ऊँच-नीच, संतान सुख में बाधा।
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चंद्र + मंगल: मन की चंचलता, धन लाभ, साहस बढ़ना।
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चंद्र + बुध: वक्तृत्व, बुद्धिमत्ता, मानसिक असंतुलन, दो विवाह के योग।
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चंद्र + गुरु: शिक्षा, धन, उच्च पद—लेकिन पाप दृष्टि हो तो रुकावट।
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चंद्र + शुक्र: विलासिता, दो विवाह, प्रेम संबंधों की अधिकता।
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चंद्र + शनि: मानसिक तनाव, माँ/धन के लिए ठीक नहीं, हर काम में रुकावट।
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चंद्र + राहु: जल से डर, विदेश यात्रा, दाग।
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चंद्र + केतु: विद्या में रुकावट, केमिस्ट का योग, मूत्र विकार।
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मंगल + बुध: तर्क क्षमता, व्यापार में सफलता, कभी क्रोध का अभाव।
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मंगल + गुरु: धार्मिकता के साथ साहस, नेतृत्व क्षमता।
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मंगल + शुक्र: प्रेम संबंध भयाक्रांत, कभी दाम्पत्य में उत्साह।
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मंगल + शनि: गंभीर संघर्ष या दुर्घटनाएँ।
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मंगल + राहु/केतु: अचानक घटनाएं, चोट, ऑपरेशन की संभावना।
आदि, इस प्रकार प्रत्येक दो ग्रह की युति का अपना-अपना प्रभाव होता है।
नोट:
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युति का फल ग्रहों के बल, मलिनता, ग्रहों के बीच की डिग्री दूरी, भाव की प्रकृति, लग्न आदि बातों पर निर्भर करता है।
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राहु-केतु की युति विशेष फल देती है, जिन्हें “छाया ग्रह” कहा जाता है, और जिनकी दृष्टि नियम भी अन्य ग्रहों से भिन्न है।
अंत में, किसी भी युति का सही विश्लेषण योग्यता और पूरी कुंडली के आधार पर ही किया जाना चाहिए, न कि केवल जुड़ाव देख कर।